गाँव में कैसे कमायें 5 लाख महिना? गांव में पैसे कमाने के तरीके

Gaon me Kya Business Kare

हमारे देश की 75% आबादी गाँव में निवास करती है. इसीलिए करोड़ों लोगो की कमाई का जरिया भी ग्रामीण क्षेत्र में ही होता है. लेकिन गावों में रोजगार के अधिक अवसर ना  होने के कारण वहां बेरोजगारी बढ़ रही है. और यहाँ  के युवक शहरों की ओर भागते हैं. और छोटे मोटे काम करके अपना गुजारा करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय भी बहुत कम होती है. इसीलिए आये दिन आपने किसानों की दुर्दशा की खबरे सुनी होंगी. हमारे देश के किसान 72 साल बाद भी गरीबी की मार झेल रहे हैं. अगर हमें अपने देश का विकास करना है तो हमें गाँवों में आमदनी के तरीके बढाने होंगे. आज की पोस्ट में हम आपको गांव में पैसे कमाने के तरीके बताने जा रहे है. आज की पोस्ट में आपको Gaon me Kya Business Kare की एक शानदार जानकारी भी दी जा रही है.

गांव में पैसे कमाने के तरीके

किसी भी क्षेत्र में हमें अगर आये के साधन ढूँढने हैं तो सबसे पहले हमें वहां उपलब्ध संसाधनों को देखना होगा. जनकी सहायता से हम वहां काम धंधे कर सके. ऐसे ही अगर हम गाँव के दृष्टिकोण से  देखे तो हमें ज़मीन, पशु, अनाज, फसलें, मसाले, फल, सब्जी, मक्का, दूध, गोबर,  तालाब  आदि संसाधन आराम से मिल जाते हैं. गाँव में उपलब्ध संसाधनों से संबधित उद्योग लगाकार हम यहाँ रोज़गार के अपार अवसर पैदा कर सकते हैं.

तो चलिए एक एक करके जानते हैं कि इन सभी उपलब्ध संसाधनों से कितने गांव में पैसे कमाने के तरीके हो सकते हैं .

पशु सम्बंधित रोज़गार

हमारे गावों में अनेक प्रकार के पशुओं का पालन किया जाता है.  जिनमें गाय, भेंस, बकरी, मुर्गी आदि का सबसे ज्यादा पालन किया जाता है, इन पशुओं से सम्बंधित बहुत सारे रोज़गार भी किये जाते हैं. जिनसे लाखों लोगों को काम मिलता है.  आज की पोस्ट में हम आपको रोज़गार का एक ऐसा उदाहरण बता रहे हैं जिसके द्वारा एक महिला 5 लाख रूपये हर  महिना कमा रही है .

यह उदाहरण  है  महाराष्ट्र के अहमदनगर के एक गांव की लड़की श्रद्धा धवन की.  यह लड़की अपने गाँव में ही बिजनेस करके हर साल 72 लाख रुपये तक कमा रही हैं. इन्होने कुछ नया नहीं किया बल्कि पुराने हो रहेकाम को नए तरीके से किया.

गाँव में 5 लाख रूपये कमाने वाली श्रद्धा

दोस्तों अगर आप भी अपने गाँव में रहकर लाखों रुपये महिना कमाना चाहते हैं तो श्रद्धा धवन की यह कहानी आपकी किस्मत बदल सकती है. महाराष्ट्र के अहमदनगर की रहने वाली इस लड़की ने एक मिसाल कायम कर दी है. श्रद्धा अभी मात्र 21 साल की हैं और इन्होने अपनी पढ़ाई की उम्र से ही अपने इस बिजनिस को संभाल लिया था. जब श्रद्धा 11 साल की थी तभी इन्होने मन में ठान लिया था कि यह अपने गाँव में ही कुछ ऐसा करेंगी जो एक मिसाल बनेगी. आज श्रद्धा इतनी सफल हो गई है की हर साल 72 लाख रूपये कमा लेती हैं.

श्रद्धा जब स्कूल में पढ़ाई कर रही थी तब उनके पिताजी को इसी बिजनिस में नुक्सान हुआ था. जिसे देखकर श्रद्धा ने इसकी कमान अपने हाथ में ले ली. और अपने तरीके से काम किया. और आज एक सफल बिजनिस वोमेन बन गई.

किस बिज़नेस से कमाएं लाखों ?

आपको बता दें की श्रद्धा धवन के पिता एक डेयरी (Dairy Milk) का बिजनेस करते थे.  आपको बता दें की डेयरी एक अंग्रेजी का शब्द है जिसे हिंदी में दुग्धालय कहते है.  आरम्भ में श्रद्धा के पास कुल 6 भैंस थी. लेकिन बिजनेस में कमी होने के कारण बाद में केवल 1 भैंस ही रह गई, जिससे परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा था. परिवार की एक मुश्किल यह भी थी की श्रद्धा के पिता दिव्यांग हैं, जो सभी काम आसानी से नहीं कर सकते थे. उन्हें इस काम के लिए भी अपनी मोटर साइकिल पर दूध ढोकर दूर-दूर तक बेचने जाना होता था. यह काम उनके लिए काफी मुश्किल था. जिसके कारण उनका बिजनिस कम होता गया. और सभी भैंसें बिक गईं और सन 1998 तक सिर्फ एक ही भेंस रह गई.

परिवार और पिता की ऐसी हालत देखकर श्रद्धा धवन से ना रहा गया और वह भी पिता के व्यवसाय में उतर आई. उस समय उसकी उम्र केवल 11 वर्ष थी. जो उम्र बच्चों की खेलने कूदने की होती है उस उम्र में श्रद्धा ने बिजनिस को अपने तरीके से आगे बढ़ाया. जो उसके लिए उतना आसान नहीं था. क्योंकि उसे भी बाइक से दूध देने के लिए जाना पड़ता था.

लेकिन जब मन में कुछ करने की ठान लिया तो आगे बढ़ने से क्या डरना. इसीलिए उन्होंने विज्ञान और आधुनिक नजरिये से डेयरी उत्पादों की जानकारी लेना शुरू कर दिया. भेंस को दिए जाने वाले चारे तथा ऐसी ही अन्य जरुरी बातो का ध्यान रखा. जिसके कारण धीरे धीरे उनका बिजनिस ट्रैक पर आने लगा.

कैसे बढ़ाया कारोबार?

श्रद्धा धवन ने इस काम को एक दम अलग नज़रिए से देखा. उन्होंने भैंसों पर खास ध्यान दिया. कई तरह की भैंसों के बारे में जानकारी हासिल की. इसके साथ ही डेयरी प्रोडक्ट में फैट के सिस्टम को भी समझा. और जो काम पुराने तरीकों से चला आ रहा था, उसमें विज्ञान का इस्तेमाल किया. उन्होंने अच्छा दूध का उत्पादन तो किया ही साथ में अपने उत्पादों को बेचने से लेकर उनकी उत्पादकता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया. उन्होंने भैंस के चारे के बारे में भी अच्छी जानकारी हासिल की और सिर्फ ऑर्गेनिक चारे का ही इस्तेमाल किया जिससे सभी उत्पादों की गुणवत्ता बढती गई.

गुणवत्ता बढ़ने से उनके व्यापार में भी बहुत बढ़ोतरी हुई. उन्होंने भेंसों के आसपास साफ – सफाई का भी विशेष  ध्यान रखा. और भैंसों की स्वास्थ्य जाँच भी समय समय पर करवाई. जिससे उनकी भेंसे स्वस्थ रहती हैं और दूध की मात्रा में भी बढ़ोत्तरी होती गई. इन सभी वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी के साथ श्रद्धा ने बहुत मेहनत भी की अपनी पढ़ाई के साथ – साथ डेयरी बिजनेस पर भी पूरा ध्यान दिया. पहले काम कम था तो खुद ही सारा काम करती थीं, आरम्भ में उन्होंने चारा खिलाने, दूध निकालने और उनकी सप्लाई तक का काम खुद ही किया. जिससे उनकी इस काम में महारत हासिल हो गई.

कितना कारोबार कर सकते हैं?

इतनी मेहनत  करने के बाद श्रद्धा को फल भी अच्छा मिला. इस समय उनका बिजनिस बहुत अच्छा चल रहा है. एक भैंस से शुरू हुआ बिजनेस अब 80 से ज्यादा भैंस तक पहुँच गया. उन्होंने इस उद्योग से अपना 2 मंजिला मकान भी खड़ा कर लिया. भैंसों को रखने के लिए भी इतना बड़ा शेड बन चूका है कि पूरे जिले में ऐसा कोई शेड नहीं है.

इस समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत है, और उनके महीने की कमाई 6 लाख रुपये तक पहुंच गई है. दूध और उसके बने उत्पाद की क्वालिटी शुद्ध होने के कारण उनकी बिक्री लगातार बढती जा रही है.  मिलावट से परेशान लोगों को जब इनकी डेयरी का पता चला तो वह भी इनकी मर्केटिंग करने लगे. श्रद्धा की डेयरी में इस समय हर दिन लगभग 450 लीटर दूध का उत्पादन होता है. जिससे अनेक प्रकार के डेयरी प्रोडक्ट भी बनाकर बेचे जाते हैं.

महिलाओं के लिए शानदार बिजनिस

गाँव में रहने वाली महिलाओं के पास रोज़गार के उतने साधन नहीं होते जितने शहर में रहने वाली एक महिला के पास होते हैं, ऐसे में  गांव की लड़की श्रद्धा धवन का यह उदहारण दुसरे गावों में रहने वाली महिलाओं के लिए एक वरदान साबित हो सकता है. अगर हमारे देश में गावों में रहने वाली महिलाओं को ऐसी dairy farming  की ट्रेनिंग दी जाए तो लाखों लोगों को रोज़गार मिल सकता है. वर्क फ्रॉम होम फॉर लेडीज का मतलब सिर्फ यह नहीं होता की सिर्फ आप कंप्यूटर पर ऑनलाइन वर्क ही करे. डेयरी का उद्योग भी घर पर अपने गाँव में रहकर भी हो सकता है. बेरोजगारी की समस्या को ऐसे ही सुलझाया जा सकता है.

हमारी सरकार के कई विभाग डेरी मिल्क से सम्बंधित उद्योगों की ट्रेनिंग पहले से ही सड़ते है,  देश का अपना एक राष्ट्रिय डेरी बोर्ड भी है जिसे NDDB कहा जाता है. NDDB का फुल फॉर्म होता है  “National Dairy Development Board“.

निष्कर्ष

दोस्तों आज की पोस्ट में आपको गांव में पैसे कमाने के तरीके की शानदार जानकारी दी गई है. आज आपने देखा की आप अपने गाँव में रहकर ही लाखों रूपये महिना कमा सकते हैं. Dairy Milk के कारोबार ने पूरे परिवार की दुनिया ही बदल गी. इसके लिए आपको कोई नया बिजनिस करने की जरुरत नहीं है, बल्कि पुराने चले आ रहे बिजनिस की नए तरीकों से करने की जरुरत है. आपने देखा कि प्रकार एक छोटी से लड़की ने विज्ञानं का सहारा लेकर अपने पिता के डेयरी व्यवसाय को कहाँ पहुंचा दिया. गावों में ऐसे बहुत सारे बिजनिस हैं जिन्हें आप नए ढंग से कर सकते हैं. और दुसरे लोगों को रोज़गार भी दे सकते हैं. रोजगार निर्माण के लिए हमें ऐसे ही आगे बढ़ना होगा और देश के बेरोजगारों को काम देना होगा.

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जय हिंदी जय भारत